संघर्ष से निकल कर पहचान बनाई है राजस्थानी शेरनी ने
रील की दुनिया से बिखेर रही है राजस्थानी संस्कृति
(रामकरण प्रजापति)
सूरतगढ। सुरतगढ़ क्षेत्र की सुमन चौहान अपने पति रामेश्वर चौहान से मिलकर टिकी एप्प के जरिए राजस्थानी कला भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ा रही है। गांव भगवानगढ़ श्रीगंगानगर की सुमन चौहान ने बताया उनकी शादी सोलह वर्ष की उमर में ही हो गई थी और उस के मा बाप सपना था मै सरकारी जॉब लगूं। आठवीं के बाद मैने ससुराल से राजकीय स्कूल और पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की। राजस्थानी गीतों, रंग मंच, नुक्कड़ नाटक के शौंक के चलते टिक टॉक पर रील बनानी शुरू की। भारत में टिक टॉक के बेन होने के बाद टिकी एप पर रील बनानी शुरू की और राजस्थानी कला संस्कृति को आगे बढ़ाया और राजस्थानी शेरनी चैनल बनाकर दर्शकों को राजस्थानी गीतों के जरिए जागरूक किया। एस आई और अन्य तयारी करने वाली सुमन चौहान उभरती हुई रील मेकर है और पूनम फाउंडेशन ट्रस्ट के जरिए ज़रूरतमंद परिवार के बच्चों को निशुल्क शिक्षा अभियान से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। वे आजीविका हेतु ब्यूटी पार्लर और महिलाओ सम्बन्धी कार्यों को आगे बढ़ाकर अछा नाम कमा रही है। सुमन चौहान ने संघर्ष मयी जीवन जीते हुए मास्टर ऑफ आर्ट पूरी की और सभी को यही संदेश दिया जीवन में पढ़ाई बहुत जरूरी है।
