Saturday, 5 October 2019

आधुनिक सावित्री बाई फूले से कम नही है पूनम प्रजापति

मजदूर परिवार की बेटी हजारों घरों को कर रही शिक्षा से रोशन

भारत को शिक्षित करना और बेटियो को आगे बढाना है लक्ष्य

दो हजार तेरह से पुरस्कार लेने किये बंद

ऊँची जिसकी उड़ान हो,
कदमो मे आसमां हो
वो क्या रुकेंगे
मंजिल जिसकी जहाँन हो।।

शिक्षा को समर्पित पूनम रामकरण प्रजापति का जन्म गाँव रामपुरा जो वर्तमान मे हनुमान जिले की पीलीबंगा तहसील मे है, नेमिचन्द् प्रजापति के घर हुआ। मजदूर परिवार मे जन्मी पूनम प्रजापति को पढ़ाई के समय काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। गांव के राजकीय स्कूल मे दसवी तक पढ़ने के बाद निकट वृती शहर सूरतगढ़ पढ़ने जाना पड़ा। दो साल पढ़ाई करने के बाद  पूनम प्रजापति की उच्च शिक्षा हेतु पढ़ाई छूट गई। पूनम प्रजापति ने पापा के साथ मेहनत मजदूरी की और फिर एक दिन सूरतगढ़ के राजकीय कॉलेज मे प्राइवेट प्रवेश लिया और स्नातक की डिग्री की। हालांकि पूनम प्रजापति का सपना तो झूग्गी -झोम्पडी और भिखारी वर्ग मे शिक्षा के जरिये सुधार करना था, ऐसे मे उन्होंने कर्ज लेकर बी एड की और फिर सूरतगढ़ छेत्र मे शिक्षा अभियान शुरू कर अलख जगाई।
दो हजार सौलह मे हुई प्रेरणादाई     इकॉ शादी

पूनम प्रजापति की शादी 31 मार्च 2016 को सामाजिक कार्यकर्ता रामकरण प्रजापति से हुई। शादी के समय नशे के खिलाफ और     पर्यावरण सरक्षण का सङ्कल्प लेते हुए शादी मे आये हुए मेहमानो को पांच सौ पौधे गिफ्ट किये और दोनो पति - पत्नी ने एक सौ पचास पौधे राजकीय स्कूल मे लगाए।

मिशन पॉजिटिव इण्डिया अभियान को दी गति
शादी के बाद वे पूनम फाउंडेशन के मिशन पॉजिटिव इण्डिया अभियान को आगे बढ़ाने मे जुटे। इस अभियान के उनके पति रामकरण प्रजापति को

प्रभारी बनाया और फिर उन्होंने अपनी टीम बनाकर झुगी- झोम्पडी, विधवा परिवार, तलाकशुदा परिवार के जरूरतमन्द बच्चो को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास शुरू किया। शिक्षा अभियान के जरिये सूरतगढ़ ब्लॉक के 1500राजकीय स्कूल और 60 आंगनबाड़ी केंद्र को जोड़ कर 12000 बच्चो को शिक्षा अभियान का लाभ दिया। इसके तहत स्टेशनरी, गर्म वस्त्र, कपड़े जूते, स्वेटर, फल आदि मिशन पॉजिटिव इण्डिया अभियान के तहत रामेश्वरम् ट्रस्ट ने जनसहयोग से बाँटे।
पूनम देश की आवाज
रामकरण पूनम प्रजापति
पूनम प्रजापति देश की आवा
जपूनम पजापति आँल

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