कला को समर्पित एक युवा।
भारत देश की लुपत हो चुकी पुरातन सरकंडा दस्तकारी कला को बचना चाहते हैं। अभिषेक कुमार चौहान।
भारत देश की इस अद्भुद कला को वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाना चाहते है ये युवा।
नहीं मिली सरकार से अब तक कोई मदद। लगभग तीन महीनो से अपने प्रयासों के कारण मीडिया में आ रहे हैं अभिषेक।
देश के साथ विदेशो में भी कला की प्रदर्शनियां लगा बढ़ाना चाहते है अपने देश का गौरव।
मौन है सरकार।
एक समय ऐसा था जब यह कला अपने चरम पर थी। इस कला की कलाकृतियों की भारत के लोगो में डिमांड थी। लेकिन वर्तमान समय में ये कला अलोप हो रही हैं। इस कला की जगह चाइनीज सजावटी समान ले रहा है। सरकार भी भारत की इस विरासती कला को कोई सहयोग नही दे रही।जिस कारण अब बहुत कम लोग इस कला के बारे में जानते हैं। उनमे से एक बसत विहार , राजपुरा शहर (पटिआला , पंजाब ) के वासी अभिषेक कुमार चौहान हैं। अभिषेक जी ने हॉल ही में अपनी बी ऐ की परीक्षा पास की है। और उन्होंने सरकंडा दस्तकारी से अद्भुद कलाकृतियां बनाई है। उन्होंने इस कला को जीवित रखने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने अपने कला के माध्यम से विभिन्न तरह की कलाकृतियां बनाकर लोगो को अचंभित कर दिया है। बीते दिनों पटेल कालेज व् सरकारी स्कूल में उत्क कला की प्रदर्शनी लगई गयी। जिसे उच्चाधिकारियों व् समाज के लोगो ने खूब सराहा। अभिषेक ने सरकंडे से बनाये मोर , झूला ,शेषनाग , घोंसला , फूल , गुलदस्ता ,झुनझुना ,डफली , भगवान श्री कृष्ण जी की आकृति ने लोगो को कायल कर दिया।
दादा जी से सीखी कला।
अभिषेक कुमार चौहान जी कहना है कि उसने यह कला अपने दादा जी श्री राम चाँद जी से सीखी है। और उन्होंने यह कला अपने चाचा जी से सीखी थी। यह कला हमें उस समय की याद दिलवाती हैं। जब हमारे पूर्वजो के पास घरों को सजानें के लिए प्लास्टिक अथवा धातु का समान नही होता था। दादा जी का सपना है की इन कलाकृतियों की देश और विदेशों में प्रदर्शनियां लगाई जाएँ। ताकि पूरा विश्वाश इस कला का दीदार कर सके और लोग इस कला को खरीदे टंकी एक और इस अमुल्ये कला को लुपत होने से बचाया जा सके। साथ ही विदेशों मुंद्रा अर्जित की सके। इस कला से अपने भारत देश का स्वाभिमान और इस वतन की माटी की खुशबू आती है।
कैसे बनती है कलाकृति।
अभिषेक ने बताया की यह कला सरकंडे से बनती है। जो की दलदल उगते है जिन्हे दलदल में घुस कर एक एक करके सरकंडे इकठे किये जाते है। और उनको कड़ी मेहनत के बाद बुन कर कलाकृति तयार की जाती है। जिन्हे बनाने कई कई दिन लग जाते है। अगर बुनती करते समय कोई सरकंडा टूट जाये तो वह कलाकृति जाती है जिसे दुबारा बनाना पड़ता है।
सरकार से मदद की उम्मीद।
दस्तकारी परिवार से होने क बावजूत अभिषेक अपनी शिक्षा ले साथ ही साथ दादा जी के मार्गदर्शन कलाकृतियां बनाने का गुण भी हासिल कर रहे हैं। क्यूंकि ये उनका पुश्तैनी वयवसाय है। लेकिन वह इस पेशे को आगे नही ले जा पा रहे। कलाकृतियां बनाने जहां कड़ी मेहनत की आवश्यकता पड़ती है और पर्दर्शनी आदि लगाने में धन की भी आवश्यकता पड़ती है। अभिषेक सरकार से उम्मीद करते है की सरकार उन्हें कला विभाग में सरकारी नौकरी दे था उनकी कला की प्रदर्शनियां सरकारी खर्चे पर लगये। ये कला अपने भारत देश का गौरव है। सरकार को इस कला को इतहास बनने से बचना चाहिए।
abhishek kumar chouhan
9988373679



nice bhai kla ko aage bdhate rho.
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